लद्दाख से उत्तराखंड तक फैले हिमालयी दर्रों को नाप रहें हैं तीन पर्वतारोही


mm
केशव भट्ट
October 10, 2018

हिंदुस्तान में हिमालयी क्षेत्र में बसे गांवों को पर्यटन से जोड़ उनकी आर्थिकी को मजबूत करने के इरादों से तीन युवा पर्वतारोही लद्दाख से उत्तराखंड तक फैले पश्चिमी हिमालयी दर्रों को नाप रहे हैं। यह दल अपने यात्रा अभियान में बीस दर्रे, जिसमें 5950 मीटर उंचे कालिंदी पास को पार कर लगभग 870 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर चुके हैं। वेस्टर्न हिमालयन ट्रेवर्स का यह दल अब अपने अभियान के अंतिम चरण में है। अगले कुछ दिनों में नेपाल के बार्डर धारचूला में पहुचंगे। जहां इनकी ये ट्रेवर्स यात्रा समाप्त होगी।

पर्वतारोही भारत भूषण ने ट्रेवर्स यात्रा मार्ग से फोन में बताया कि, वेस्टर्न हिमालयन ट्रेवर्स के इस अभियान में उनके अलावा प्रणव रावत और शेखर सिंह शामिल हैं। उन्होंने लद्दाख के मार्खा वैली में चिलिंग ब्रिज से 27 अगस्त को अपनी यह यात्रा शुरू की। रूमसे, शोकर लेक, सुमररी लेक तथा 5580 मीटर उंचे पारंगला को पार कर उनके दल ने हिमांचल की घाटी में प्रवेश किया। मुद से काफलू गांव, करछम होते हुए सांगला निकले और लमखागा होते हुए उत्तराखंड के हर्षिल में पहुंचे। यहां से गंगोत्री से होते हुए 5950 मीटर कालिंदी पास को पार किया। उन्होंने बताया कि गढ़वाल में आॅली से चलने के बाद इस दल ने माणा, आला, सिथेल, कनोल, वान, अली बुग्याल, हिमनी गांव होते हुए कुमाउं की दानपुर घाटी में सोराग होते हुए खाती गांव में प्रवेश किया। इसके बाद जोहार घाटी में लीलम गांव होते हुए उनकी आगे की यात्रा जारी है।

इस दल के युवा पर्वतारोही उत्तराखंड में हिमालय के सीमांत गांवों से होते हुए जा रहे हैं। अपने पड़ाव में वो गांव में रुक कर ग्रामीणों समेत स्कूलों में इस यात्रा के महत्व के बारे में संदेश भी देते जा रहे हैं कि किस तरह से पर्यटकों की आवाजाही से उनकी आर्थिकी मजबूत होगी।
भारत भूषण ने बताया कि विदेशों में कई तरह के हिमालयी यात्रा मार्ग हैं, जिन्हें ट्रेल कहा जाता है। नेपाल में ग्रेट हिमालियन ट्रेल तो विश्व प्रसिद्ध है। यहां हजारों की तादाद में पर्यटक जाते रहते हैं। इसके अलावा यू.एस. में पेसिफिक क्रेस्ट ट्रेल भी काफी प्रसिद्ध है। उन्होंने बताया कि वेस्टर्न हिमालयन ट्रेवर्स का यह ट्रेल काफी सुंदर और रोमांचक है। इस पैदल साहसिक ट्रेल मार्ग में रेगिस्तान, बर्फिले पहाड़, ग्लेशियर के साथ ही हरियाली के दीदार होते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी इस यात्रा का उदे्श्य भी हिंदुस्तान में लद्दाख, हिमांचल और उत्तराखंड में ट्रेल को बढ़ावा देना है ताकि हिमालयी क्षेत्रों में बसे लोगों की भी आय बढ़े।

mm
केशव भट्ट

बागेश्वर निवासी केशव भट्ट पत्रकार होने के साथ-साथ घुमक्कड़ और पर्वतारोही हैं.