2 फरवरी त्रेपन सिंह नेगी जी की 23 वीं पुण्य तिथि


नैनीताल समाचार
February 3, 2019

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2 फरवरी को त्रेपन सिंह नेगी जी की 23वीं पुण्यतिथि थी। नैनीताल समाचार की वैव पत्रिका में शीशपाल गुसें द्वारा लिखा गया यह आलेख उनकी स्मृति में प्रकाशित किया जा रहा है… सम्पादक

महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, दो बार लोक सभा सांसद रहे, तीन बार विधायक रहे श्री त्रेपन सिंह नेगी की 23 वीं पुण्य तिथि पर नमन। आप टिहरी गढ़वाल स्टेट के सबसे नेताओं में थे।आदर्श, नैतिकता, ईमानदारी शब्द त्रेपन सिंह जी से शुरू होते हैं। आपका जन्म 14 अक्टूबर 1923 को ग्राम दल्ला, पट्टी आरगढ़, भिलंगना टिहरी में हुआ 2 फरवरी 1996 को नरेंद्रनगर में महाप्रयाण हुआ।

श्री हेमवतीनंदन बहुगुणा को 1975 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से श्रीमती इंदिरा गांधी ने जैसे हटाया, इसका असर पौड़ी गढ़वाल टिहरी गढ़वाल में साफ दिखाई देने लगा था। बहुगुणा इमरजेंसी के खिलाफ सभी बड़े नेताओं के साथ थे। 1977 में लोक सभा चुनाव कराने की इंदिरा गांधी की घोषणा से बहुगुणा कांग्रेस फ़ॉर डेमोक्रेसी के अधीन अपने मूल घर पौड़ी गढ़वाल आ गए थे।

उन्होंने टिहरी कांग्रेस के महामंत्री श्री बन माली पैन्यूली के जरिए श्री सिटिंग कांग्रेस के एमपी श्री परिपूर्णा नंद पैन्यूली को मैसेज भिजवाया कि वे उनकी डेमोक्रेसी से लड़े। वे स्वंय भी टिहरी आये। लेकिन पैन्यूली जी उनके पास नहीं आये। क्योंकि परिपूर्णा जी मानवेन्द्र शाह को हराकर कर 1971 में सांसद बने थे। उन्होंने सोचा होगा जब वो राजा को हरा सकते हैं तब , बहुगुणा का कैंडिडेट क्यों बने।

तेज तर्रार बहुगुणा ने समय न जाया कर त्रेपन सिंह नेगी को डेमोक्रेसी का लोक सभा प्रत्याशी बना दिया। त्रेपन सिंह नेगी का बायोडाटा भी बहुत मजबूत था। 1962—1967 में टिहरी विधानसभा से विधायक रह चुके थे। और उससे पहले टिहरी प्रजा मंडल सरकार में 24 विधायक में एक विधाय​क थे। केंद्र से जोति प्रसाद चीफ मिनिस्टर थे। खुशहाल सिंह रांगड़, आनंद शरण रतूड़ी, ठाकुर किशन सिंह, कुशला नंद गैरोला मंत्री थे। उनमें त्रेपन सिंह जानकर विधायक थे।

इससे पहले 11 जनवरी 1948 को कीर्ति नगर में गोली से शहीद हुए सकलाना पट्टी के नागेंद्र सकलानी, भरदार पट्टी के मोलू सिंह नेगी के जनाजे की अगुवाई टिहरी शहर तक त्रेपन सिंह नेगी ने की थी। इसमें हज़ारों लोगो का उन्होंने उस दिन नेतृत्व किया था। इसी दिन से उनकी राजनीतिक नीव पड़ी। जो आगे चलकर चमकदार हुई तो साहब बहुगुणा जी ने 1977 में किसी एरो गेरो नेता पर दांव नहीं खेला था। त्रेपन सिंह नेगी टिहरी जीत गए। स्वयं बहुगुणा जी पौड़ी से जीत गए। बहुगुणा पेट्रोलियम मंत्री बने। अटल जी विदेश, आडवाणी जी सूचना प्रसारण। मोरारजी देसाई जी प्रधानमंत्री। 1979 में कांग्रेस ने उन्हें केंडिडेट बनाया। वे पुनः लोक सभा के लिए चुने गए।

हालांकि तब इतनी महंगाई नहीं थीं, न इतनी भूख। वे चाहते बहुगुणा से लाभ ले सकते थे। लेकिन उन्होंने पूरा जीवन सादगी, ईमानदारी से निभाया। उनका ध्यान गांव की तरफ रहा और वहाँ रहने वाले लोगों की तरफ। उनका घर न नई दिल्ली में है न देहरादून में। उनका बेटा शेखर गांव दल्ला में रहता है। वहीं से पढ़ाने विद्यालय जाते हैं।

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