हिंदी के जानेमाने साहित्यकार-नाटककार हिमांशु जोशी की देह पंचतत्व मे विलीन


नैनीताल समाचार
November 23, 2018
सी एम पपनै
प्रबंध संपादक प्रकृतलोक
प्रबंधक IPPCI
नई दिल्ली, 23 नवम्बर
पत्रकार व हिंदी साहित्य जगत की ख्यातिप्राप्त विभूति हिमांशु जोशी का आज 83 वर्ष की उम्र मे दिल्ली में देहावसान हो गया। अंतिम संस्कार दिन मे 1 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट मे कर दिया गया।
अनेकों साहित्यकारो, कथाकारों, पत्रकारों, रंगकर्मियों व समाजसेवियों ने स्व0 हिमांशु जोशी को अश्रुपूर्ण भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
निगम बोध घाट में श्रद्धांजलि अर्पित करने वालो मे उत्तराखंड के प्रबुद्ध जनों मे प्रदीप पंत, पंकज बिष्ट, महेश दर्पण, हरिसुमन बिष्ट, राजकुमार गौतम, चारुतिवारी, हेम पन्त, चन्दन डांगी व प्रदीप वैदवाल मुख्य थे।
4 मई 1935 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले मे जनमे मृदुभाषी हिमांशु जोशी को हिंदी साहित्य की विविध विधाओं का पुरोधा माना जाता था। आप हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप से लंबे समय तक जुड़े रहे। आपने 7 उपन्यास, 3 कविता संग्रह, 18 कहानी संग्रह के अतिरिक्त वैचारिक संस्मरण, यात्रा व्रतांत के साथ-साथ बाल साहित्य पर भी अमिट लेखन कार्य किया। आपके साहित्य लेखन पर दर्जनों विद्यार्थियों ने शोध कार्य कर डॉक्टरेट हाशिल की। आपके लोक साहित्य पर फिल्म व दूरदर्शन पर अनेकों कार्यक्रम भी बने।
नाटक ‘कगार की आग’ जो 1975 मे लिखा गया था विभिन्न भाषाओं मे अनुवादित हुआ। कुमाउनी बोली मे अनुवादित नाटक के दिल्ली सहित उत्तराखंड के अनेक शहरों मे मंचन किया गया। प्रसिद्ध नाट्य संस्था पर्वतीय कला केंद्र ने इस नाटक के अनेको शो दिल्ली मे मंचित किए।
आप भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के हिंदी विभागों के सलाहकार सदस्य के साथ-साथ प्रधान मंत्री द्वारा गठित केंद्रीय हिंदी सलाहकार समिति के तीन वर्ष तक सदस्य भी रहे। केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड, अंतरराष्ट्रीय हिंदी लेखक मंच, आर्थश गिल्ड ऑफ इंडिया, फिल्म राईटर्स ऐशोसिएशन से भी आप जुड़े रहे।
वर्तमान में स्व0 हिमांशु जोशी हिंदी अकादमी दिल्ली की पत्रिका ‘इंद्रप्रस्थ भारती’ के संपादक मंडल व गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा के अध्यक्ष पद पर आसीन थे।
हिमांशु जोशी के देहावशान से न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि देश के हिंदी साहित्य जगत ने एक महान विद्वान मनीषी को खो दिया है। इस क्षति की भरपाई नही की जा सकेगी।
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