देहरादून का सीवर ढोकर बीमार हो गई है सुसवा नदी


नैनीताल समाचार
June 13, 2018

कभी सुगंधित बासमती चावल के लिये अपनी पहचान रखने वाली दूधली घाटी के लिए यह नदी तंत्र वरदान हुआ करता था। लेकिन अब यह देहरादून शहर की गंदगी ढोने वाली गंदी नाली बन गई है। दूधली घाटी की सिंचाई व्यवस्था को तो इसने सीधे तौर पर सालों से बरबाद कर दिया है, अब इस पूरी घाटी में पेयजल व्यवस्था भी दूषित हो गई है…

स्पेक्स, जाॅय एवं दूधली ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 8 से 19 मई 2018 तक बिन्दाल, रिस्पना एवं सुसवा नदी के पानी के 24 नमूने अलग-अलग जगहों से एकत्रित किये गये, जिनका रासायनिक परीक्षण स्पेक्स की लैब में किया गया। इन नमूनों में क्रोमियम, आयरन, लेड, मैग्नीज, क्लोराइड, फाॅस्फेट, सल्फेट, नाइट्रेट जैसे घातक रसायन तथा टोटल एवं फीकल काॅलीफाॅम आॅयल एण्ड ग्रीस मानकों से कई गुना अधिक पाये गये, जो कि मिट्टी, जनजीवन, कृषि, पालतू व जंगली जानवरों एवं जलीय पर्यावरण, के लिए घातक हैं। अब दूधली क्षेत्र में कैंसर के रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। स्पेक्स विगत तीन वर्षों से लगातार रिस्पना, बिन्दाल एवं सुसवा नदी के पानी का परीक्षण कर रहा है। प्रत्येक वर्ष लगातार इन खतरनाक रासायनिक तत्वों में वृद्धि दर्ज हो रही है।

एक तरफ से रिस्पना तो दूसरी तरफ से बिंदाल नदी पूरे देहरादून शहर का सीवर लेकर आगे बढ़ती है। क्लेमेंटाउन की तरफ से आने वाले गधेरे भी शहर के शेष हिस्से का सीवर लेकर सुसवा में ही मिलते हैं। कहने को कारगी चैक के निकट बिंदाल नदी में और दून विश्वविद्यालय के निकट रिस्पना नदी में एक-एक सीवर शोधन प्लांट स्थापित किए गए हैं। लेकिन ये प्लांट आज तक काम करते हुए नहीं देखे गए हैं। इस तरह पूरे देहरादून शहर का सीवर, गंदगी, घरों तथा फैक्टिरियों का पानी रिस्पना, बिंदाल, क्लेमेंटाउन नालों के माध्यम से सुसवा तक पहुंचता है। इसकी वजह से यह एक पूर्ण नदी तंत्र, जो बाद में सौंग से मिलकर गंगा मंे समाहित होता है, पूरी तरह से प्रदूषण से बदहाल होता चला जा रहा है।

कभी सुगंधित बासमती चावल के लिये अपनी पहचान रखने वाली दूधली घाटी के लिए यह नदी तंत्र वरदान हुआ करता था। लेकिन अब यह देहरादून शहर की गंदगी ढोने वाली गंदी नाली बन गई है। दूधली घाटी की सिंचाई व्यवस्था को तो इसने सीधे तौर पर सालों से बरबाद कर दिया है, अब इस पूरी घाटी में पेयजल व्यवस्था भी दूषित हो गई है। इस घाटी के ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति भूजल से की जाती है। भूजल में भी दूषित तत्वों की भरमार हो गई है, जिसकी वजह से क्षेत्र में चर्म रोग, स्वास रोग तथा जल प्रदूषण से संबंधित अनेक बीमारियों से लोगों का जीना दूभर है। तीन तरफ से जंगलों से घिरी एक हरी-भरी घाटी के जीवन तंत्र में जल प्रदूषण विष घोल रहा है।

दूधली घाटी के ग्रामीणों के आग्रह पर स्पेक्स संस्था के ब्रजमोहन शर्मा ने घाटी के गांवों से पानी के सेंपल लेकर अपनी लेबोरोटरी में इनका परीक्षण कराया, जिसमें ये चैंकाने वाले तथ्य सामने आए। घाटी के ग्रामीण जो पानी पी रहे हैं वह किस कदर दूषित है, स्पेक्स की रिपोर्ट से सगबकी आंखें खुल जाएंगी। सुसवा में आयरन, क्रोमियम, लेड मानकों से बहुत अधिक, क्लोराइड, नाइट्रेट व सल्फेट भी बहुत अधिक पाये गये हैं। पानी में आक्सीजन की मात्रा कम है व टोटल व फीक्ल काॅलीफार्म 1600 व 1200 गुणा पाये गये।

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