Category Archives: Sampadikya

आशंकाओं में घिरा नेपाल

  केन्द्रीय और प्रान्तीय विधान सभाओं में चुनाव शान्तिपूर्वक सम्पन्न हो जाने के बाद भी नेपाल अनेक तरह की आशंकाओं से घिरा दिखलाई देता है। एमाले और माओवादियों के तत्काल विलय की संभावना न दिखाई देने से नेपाल के लोग सशंकित हैं। इसीलिये मतदान सम्पन्न होने और शुरूआती चुनाव परिणाम आते वक्त जो उत्साह दिखाई […]

दो दिवसीय उत्तराखंड महिला सम्मेलन

‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ से जुड़ी मेधा पाटकर ने उत्तराखंड में बनने वाले पंचेश्वर बांध के बारे में भी खुल के बात की। उन्होंने कहा ‘हम लोग नर्मदा को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और पहाड़ के लोगों को महाकाली को बचाने के लिये लड़ना होगा।’ उन्होंने कहा ‘यह बहुत दुःख का विषय है कि […]

30 साल में 360 डिग्री घूमी राजनीति

सम्भवतः इस बार संसद के शीतकालीन सत्र में ‘मुस्लिम वीमेन (प्रोटेक्शन आॅफ राइट्स आॅन मैरिज) बिल’ पारित होकर जल्दी ही कानून का रूप ले ले। इस कानून के लागू होने के बाद सरसरी तौर पर तीन बार तलाक-तलाक कह कर किसी मुस्लिम महिला को उसके पति द्वारा छोड़ दिया जाना कानूनन दंडनीय अपराध हो जायेगा। […]

चुनावों में मीडिया का दुरुपयोग

चुनावों के खेल भी गजब होते हैं। लोकतंत्र में आदर्श रूप में हर निर्णय जनता की सहमति से लिया जाना चाहिये और चूँकि समूची जनता एक साथ राय-मशविरे के लिये नहीं बैठ सकती, इसलिये उसके द्वारा प्रतिनिधि चुने जाने का तरीका बना। जाहिर है कि इन चुनावों के विश्वसनीय न होने पर लोकतंत्र ही निरर्थक […]

हम क्यों चैन की बंसी बजा रहे हैं?

देश लगातार नाकामयाबियों, बल्कि विघटन की ओर जा रहा है और हम देशवासी हैं कि चैन की वंशी बजा रहे हैं। ऐसा क्यों ? ऐसा इसलिये क्योंकि हमारे दिमाग में यह भर दिया गया है कि जो कुछ हो रहा है, वह सब हमारे भले के लिये है। नोटबन्दी को लें। अधिसंख्य लोगों को यह […]

संपादकीय : इस आधार का क्या आधार?

‘आधार कार्ड’ को लेकर सरकार की भ्रम फैलाने की कोशिश जारी है। 24 अगस्त को निजता के अधिकार के बारे में सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय संविधान पीठ का सर्वसम्मत निर्णय आने के बाद सरकार के रवैये में सावधानी और लचीलापन आ जाना था, क्योंकि आधार भी अन्ततः निजता का ही एक प्रकार है। मगर […]