Category Archives: Interview

आदिवासियों के साथ लेखकों और इतिहासकारों ने बहुत बेईमानी की है : ग्लैडसन डुंगडुंग

आदिवासी लेखक ग्लैडसन डुंगडुंग ने आदिवासी अस्मिता के संघर्ष और उनके अस्तित्व पर बहुत लिखा है और ख़ुद भी संघर्षरत हैं। उनका कहना है कि प्राकृतिक सम्पदा के लिए आदिवासियों को नक्सली बताकर मारा जा रहा है। समाजसेवी एवं लेखक विद्या भूषण रावत ने उनसे विस्तृत चर्चा की। प्रस्तुत है संपादित अंश : हाल ही […]

गैरसैंण राजधानी समन्वय समिति के संयोजक चारू तिवारी से बातचीत

हम भी ये नहीं कहते कि गैरसैंण बन जाएगा तो सब कुछ बदल जाएगा लेकिन हम यह जरूर कहते हैं कि विकास का रास्ता गैरसैंण से निकल सकता है। हमारे नेता और अधिकारी सुविधाभोगी जगहों पर रहना सीख गए हैं। वे ऊपर नहीं आना चाहते। जिस दिन वे ऊपर आ गए तो पहाड़ की समस्याओं […]

बातचीत जसिंता केरकेट्टा से

स्कूल के लड़के.लड़कियों के पत्र मेरे पास आने लगे कि उन कहानियों को पढ़कर हमारे जीवन में बदलाव आया है। तब मुझे एक नया रास्ता सूझा कि हम अपनी ही खुशी के लिए नहीं, दूसरों के लिए भी लिख सकते हैं। इसलिए लिखना मुझे हमेशा जारी रखना चाहिए। युवा हिन्दी कवियित्री जसिन्ता केरकेट्टा झारखण्ड के […]

बच्चों को चीज़ों को तोड़ने की आज़ादी दो

हम महंगे खिलौने नहीं खरीद सकते थे, इसलिए हम हमेशा जोड़-तोड़ में लगे रहते थे. माचिस व सिगरेट के डब्बे, बटन और जूता पालिश की डिबिया जैसी जाने कितनी चीज़ें हमारे खिलौनों का कच्चा माल बन जाती थीं. एक धनी रिश्तेदार ने एक बार उपहार में मुझे मेक्कानो सेट दिया था और मैं बरसों तक […]

‘अगर आप मानते हैं कि अन्याय हो रहा है तो आपको लड़ना ही होगा’ : मेधा पाटकर

‘उत्तराखंड महिला सम्मेलन’ में प्रतिभाग करने हल्द्वानी पहुंची, ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की मशहूर एक्टिविस्ट मेधा पाटकर ने उत्तराखंड में प्रस्तावित 311 मीटर ऊंचाई वाले दुनिया के दूसरे सबसे ऊंचे बांध ‘पंचेश्वर बांध’ पर ‘समाचार’ के साथ बात की. भारत और नेपाल का सीमांकन करने वाली महाकाली नदी पर प्रस्तावित इस कथित ‘बहुउद्देशीय विकास परियोजना’ की […]

कला का बड़ा उद्देश्य समाज को बेहतरीन बनाना है : बंजारा

यूं तो एक चित्रकार को समझने बूझने के लिए उसके कैनवास के भीतर ही झांकना होगा लेकिन एक चित्रकार के भीतर के कलाकार की समग्र गहराई को सिर्फ कुछ कैनवास देखकर समझ पाना मुश्किल है। इसकी दो वजहें हैं एक तो ये कि चित्रकला विचार के संप्रेषण का बहुत सहज माध्यम नहीं है और दूसरा कि चित्रकार एक […]