अंधविश्वास बढ़ाते मंत्री-विधायक


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नवीन जोशी
February 23, 2018

 

नवीन जोशी

राजनीति में दिमागी दीवालियेपन के उदाहरण कम नहीं मिलते. भाजपा के अखिल भारतीय उभार के बाद तो ऐसे उदाहरणों की कमी न रही. जब प्रधाननमंत्री नरेंद्र मोदी ही यह कहते हों कि भगवान गणेश का किस्सा यह साबित करता है कि उस जमाने में हमारे देश में प्लास्टिक सर्जरी बहुत उन्नत थी और कर्ण का उदाहरण बताता है कि हमारे यहां जीनेटिक साइंस भी तब बहुत विकसित थी, तो उनकी पार्टी के नेताओं की क्या कहें.

तो, आने वाले दिनों में अगर हम राजस्थान विधान सभा के अंदर पूजा-पाठ और हवन होने की खबर सुनें तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

बिल्कुल ताजा वाकयाहै. राजस्थान के भाजपा विधायकों ने विधान सभा के ‘शुद्धीकरण’ की मांग उठायी है ताकि सदन ‘भूतों’ से मुक्त हो सके. बीते बुधवार को स्वाइन फ्लू से एक विधायक की मृत्यु के बाद यह मांग उठी है. कुछ दिन पहले भी स्वाइन फ्लू ने एक अन्य विधायक की जान ले ली थी. राजस्थान, विशेषकर जयपुर इन दिनों स्वाइन फ्लू की चपेट में है. अब तक करीब दो दर्जन विधायकों का इस बीमारी के लिए इलाज हो चुका है.

भाजपा  के मुख्य सचेतक कालू लाल गुर्जर ने गुरुवार को बताया कि उनकी पर्टी के कई विधायकों  ने विधान सभा में पूजा-पाठ कराने की मांग की है ताकि वह ‘दोष-मुक्त’ हो सके. पत्रकारों को उन्होंने बताया कि अगर पूजा-पाठ हो जाए, ठीक से शुद्धीकरण हो जाए तो जो भी ‘दोष’ होगा वह ठीक हो जाएगा. जब उनसे पूछा गया कि क्या भूत-प्रेत होते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि कभी-कभी आत्माओं को शारीरिक जन्म नहीं मिल पाता तो भटकती रहती हैं और वे ऐसा (विधायकों की मौत) कर सकती हैं.

‘इण्डियन एक्सप्रेस’ में शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक गुर्जर ने बताया कि अपने विधायक कल्याण सिंह चौहान की मृत्यु के बाद कुछ भाजपा विधायक मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ बैठे थे तो उन्होंने यह मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि लगता है कांग्रेस की पूर्व सरकार ने विधान सभा को नये भवन में स्थानान्तरित करते समय  ठीक से पूजा-पाठ नहीं की. भाजपा विधायक हबीबुर्रहमान ने कहा कि जब से विधान सभा का यह नया भवन बना है, तबसे ऐसी बातें होती रही हैं. सभी जानते हैं कि यह श्मशान की जगह बना है.  यहां कब्रिस्तान भी था.

उधर, राजस्थान कांग्रेस विधायक धीरज गुर्जर ने भाजपा पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया है. उन्होंने भाजपाइयों से कहा कि आपको भूत इसलिए दिख रहे हैं कि शायद आप ही ने उन्हें मारा है. विधान सभा अपशकुनी नहीं, लिकतंत्र का मंदिर है. मगर भाजपाइयों को तो स्वाइन फ्लू की बजाय, भटकती आत्माओं का डर लगा हुआ है.

दुर्भाग्य से भाजपा के छोटे से बड़े कई नेता अक्सर अजब-गजब बयान देते रहते हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता. उलटे वे अंधविश्वास को बढ़ावा देती हैं.  राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने, जो इंजीनीयरिंग की डिग्री लिये हुए हैं, कुछ समय पहले कहा था कि गाय अकेला ऐसा पशु है जो सांस में आक्सीजन लेता ही नहीं छोड़ता भी है, कि गोबर में रेडियोधर्मिता-निरोधी गुण हैं, कि गोमूत्र से कैंसर ठीक हो जाता है.

पिछले दिनों केंन्द्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने यह कह कर सब को हैरत में डाल दिया था कि डारविन का ‘उत्पत्ति का सिद्धांत’ गलत है. उन्होंने तर्क दिया कि जबसे हम कहानियां सुनते आये हैं, जबसे किताबें लिखी जा रही हैं, आज तक किसी ने यह नहीं कहा या लिखा कि हमने जंगल में बंदर को मनुष्य बनते देखा. मंत्री जी ने सुझाव दिया कि स्कूली पाठ्यक्रम से डारविन का सिद्धांत हटा दिया जाना चाहिए क्योंकि बच्चों को गलत विज्ञान पढ़ाया जा रहा है.

केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने 2015 में जब वे जल संसाधन मंत्री के रूप में गंगा सफाई का काम देख रही थीं, कहा था कि गंगा शिवजी की जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, इसलिए उसका उद्गम गोमुख न होकर कैलाश मानसरोवर होना चाहिए. उन्होंने रुड़की स्थित राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान से कहा था कि वे कैलाश मानसरोवर में गंगा के उद्गम का पता लगाएं. उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा था कि लाखों साल पहले संत कणद ने परमाणु परीक्षण किया था. प्रधानमंत्री की ऐसी बातों का जिक्र ऊपर किया ही जा चुका है.

हमारा जीवन वैसे ही अनेक अंधविश्वासों से घिरा है. सुदूर गांव-कस्बों में ही नहीं, बड़े शहरों तक में कई आदिम मान्यताएं प्रचलित हैं जो अक्सर बहुत अमानवीय और वीभत्स होती हैं. चिकित्सा विज्ञान की खूब प्रगति के बावजूद सांप के काटने या पीलिया हो जाने पर ओझा से झाड़-फूक कराते हुए कितने ही लोग मृत्यु को प्राप्त होते हैं. मासिक-धर्म की अवैज्ञानिक व्याख्या के कारण आज भी अधिकसंख्य महिलाएं नारकीय स्थितियों में रहने को अभिशप्त हैं. किसी पेड़ के स्पर्श या किसी कुंए के जल से असाध्य रोगों के उपचार की अफवाह फैलते ही लाखों की भीड़ उस ओर दौड़ लगाती है.

कभी जनता देव-प्रतिमाओं को दूध पिलाने उमड़ पड़ती है. व्यभिचारी और ठग ‘बाबा’ देश भर में फल-फूल रहे हैं. ‘बाबा’ राम रहीम के अपराध के किस्से खुलते हाल ही में देश भर ने देखे. उसके बाद भी ‘आस्थाएं’ टूट नहीं रहीं. आशाराम बापू और राम रहीम जैसे कई अपराधी तत्वों के जेल जाने के बावजूद ऐसे कई ‘बाबा’ सक्रिय हैं और लाखों लोग उनके अंध अनुयायी हैं. अनन्त किस्से हैं जिनसे साबित होता है कि हमारे समाज में अवैज्ञानिक सोच गहरे पैठा है. समाज की प्रगति के लिए मनुष्य में वैज्ञानिक चेतना विकसित कर इन मिथ्या मान्यताओं को दूर करना अति आवश्यक है.

मगर यहां तो विधान सभा को पूजा-पाठ और हवन से ‘दोषमुक्त’ करने की बातें विधायक ही कर रहे हैं. बड़े मंत्री और नेता स्कूली पाठ्यक्रम में अवैज्ञानिक बातें शामिल करने की सलाह दे रहे हैं. ऐसे में जनता अंधविश्वासों से कैसे मुक्त होगी?  समाज में व्याप्त अवैज्ञानिकता और अंधविश्वास को दूर करने की जिम्मेदारी किसकी है?

 

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नवीन जोशी

नैनीताल समाचार की सम्पादकीय टीम के सदस्य नवीन जोशी 'हिंदुस्तान' लखनऊ के सम्पादक पद से सेवानिवृत्त होकर अब अनेक अख़बारों के लिये कॉलम लिखते हैं. वे एक कथाकार हैं और उनका उपन्यास 'दावानल' बेहद प्रशंसित रहा है.